Satlok_Vs_Earth

काल लोक/पृथ्वी लोक पर प्रत्येक जीव दुःखी है।
सतलोक सुख का सागर है। वहां दुख नाम की कोई चीज़ नहीं। जन्म-मृत्यु नहीं है। बुढ़ापा नहीं है।
सतलोक में हर हंस आत्मा का अविनाशी शरीर होता है।
जबकि पृथ्वी लोक / काल लोक में सब कुछ विनाश के अंदर आता है।

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