kabir Gyan
#कबीरसाहेबजी_का_अद्भुत_ज्ञान
परमेश्वर कबीर जी ने कहा:-
करनी तज कथनी कथैं, अज्ञानी दिन रात ।
कुकर ज्यों भौंकत फिरें सुनी सुनाई बात ।।
परमेश्वर कबीर जी ने कहा:-
मूर्ख के समझावतें, ज्ञान गाँठि का जाय।
कोयला होत न उजला, भावें सौ मन साबुन लाय।।
बिन उपदेश अचम्भ है, क्यों जिवत हैं प्राण।
भक्ति बिना कहाँ ठौर है, ये नर नाहीं पाषाण।।
परमात्मा कबीर जी कह रहे हैं कि हे भोले मानव! मुझे आश्चर्य है कि बिना गुरू से दीक्षा लिए किस आशा को लेकर जीवित है।
जिनको यह विवेक नहीं कि भक्ति बिना जीव का कहीं भी ठिकाना नहीं है उनकी बुद्धि पर पत्थर गिरे हैं।
Kabir Prakat Diwas 14 June
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें