पूर्ण गुरु बिना जीव सुखी नहीं रह सकता।
कबीर परमेश्वर का सर्व मानव को संदेश
मनुष्य जीवन में गुरु का होना अति आवश्यक है।
गुरु बिन माला फेरते, गुरु बिन देते दान। गुरु बिन दोनों निष्फल हैं, चाहे पूछो वेद पुराण।।
गुरु बिना माला फेरना पूजा पाठ करना और दान देना सब व्यर्थ चला जाता है चाहे वेद पुराणों में देख लो अर्थात गुरु से ज्ञान प्राप्त किये बिना कोई भी कार्य करना उचित नहीं है।
गुरु गोविंद दोनों खड़े, किसके लागूं पाय।
बलिहारी गुरु आपने, जिन गोविंद दियो मिलाय।।
कबीर परमेश्वर जी गुरु को अधिक महत्व देते हैं। वह गुरु को ईश्वर से भी बड़ा मानते हैं। उन्होंने बताया है कि ईश्वर का दर्शन गुरु के माध्यम से ही हो सकता है। गुरु ही गुरु और गोविंद अर्थात शिक्षक और भगवान में अंतर करा सकता है बता सकता है। अर्थात एक मानव को भगवान की पूजा से पूर्व अपने गुरु की पूजा करनी चाहिए। एक मां बच्चे की प्रथम गुरू होती है। मां ही बच्चे को उसके पिता और अन्य लोगों का परिचय कराती है।
लेकिन गुरु भी पूर्ण और आधिकारिक होना चाहिए
पूर्ण गुरु की पहचान गीता अध्याय 15 श्लोक 1 से 4 में कहा है
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वेदों में पूर्ण संत की पहचान
”सतगुरु के लक्षण कहूं, मधूरे बैन विनोद। चार वेद षट शास्त्र, कहै अठारा बोध।।“
सतगुरु गरीबदास जी महाराज अपनी वाणी में
पूर्ण संत की पहचान बता रहे हैं कि वह (पूर्ण संत) चारों वेदों, छः शास्त्रों, अठारह पुराणों आदि सभी ग्रंथों का पूर्ण जानकार होगा अर्थात् उनका सार निकाल कर बताएगा। यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्र 25, 26 में लिखा है कि वेदों के अधूरे वाक्यों अर्थात् सांकेतिक शब्दों व एक चौथाई श्लोकों को पुरा करके विस्तार से बताएगा व तीन समय की पूजा बताएगा। सुबह पूर्ण परमात्मा की पूजा, दोपहर को विश्व के देवताओं का सत्कार व संध्या आरती अलग से बताएगा वह जगत का उपकारक संत होता है।
यजुर्वेद अध्याय 19 मन्त्र 25
वर्तमान में पूर्ण परमेश्वर संत रामपाल जी महाराज के रूप में तत्वदर्शी पूर्ण संत की भूमिका निभा रहे हैं।
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