Enemy of the intoxicated jaan
नशा चाहे शराब, सुल्फा, अफीम, हिरोईन आदि-आदि किसी का भी करते
हो, यह आपका सर्वनाश का कारण बनेगा। नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान
बनाता है। फिर शरीर का नाश करता है। शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग हैं :- 1ण्
फेफड़े, 2ण् जिगर (लीवर), 3ण् गुर्दे (ज्ञपकदमल), 4ण् हृदय। शराब सर्वप्रथम इन चारों
अंगों को खराब करती है। सुल्फा (चरस) दिमाग को पूरी तरह नष्ट कर देता है।
हिरोईन शराब से भी अधिक शरीर को खोखला करती है। अफीम से शरीर कमजोर
हो जाता है। अपनी कार्यशैली छोड़ देता है। अफीम से ही चार्ज होकर चलने लगता
है। रक्त दूषित हो जाता है। इसलिए इनको तो गाँव-नगर में भी नहीं रखे, घर की
भारत देश में ऐसी कहीं संस्थाऐ है लेकिन ईस नशे को भारतीय लोगों को दुर नहीं कर पायी है बहुत प्रयास किया है आखिर क्यों नहीं छुट पा रहा है ये जानलेवा नशा जो मनुष्य जीवन को बर्बाद कर रहा है बेचारी बहिन बेटियों का जीवन नरक बन गया है जिसके घर में शराबी पति हो या बेटा वह चैन जी नहीं है ईस नशे के कारण तो लाखो जिंदगियां बर्बाद हो गई है।
नशे को जङ से खत्म करने के लिए मन सारे विकारों को छोड़कर ही संभव है और ये घटिया विकार केवल शास्त्रानुकूल सतभक्ति करने से ही छुटेंगे और वर्तमान में सतभक्ती केवल संत रामपाल जी महाराज जी के पास है संत रामपाल जी महाराज जी के सानिध्य में लाखों परिवार नशे छोङकर शांति से जीवन जी रहे हैं।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें