शादी में फिजूलखर्च बंद करो

विवाह में प्रचलित वर्तमान परंपरा का त्याग :-
विवाह में व्यर्थ का खर्चा त्यागना पड़ेगा। जैसे बेटी के विवाह में बड़ी बारात
का आना, दहेज देना, यह व्यर्थ परंपरा है। जिस कारण से एक गरीब पिता कर्ज लेकर जीवन भर खुन के आंसू रोता है अपनी बेटी को खुश रखने के लिए वह लोकलाज से उपर नहीं उठ पाता है। 
समाज में आजतक शादियाँ में फिजूलखर्च बंद करने के लिए किसी संस्था ने ईस पर बल दिया है आखिर कैसे एक गरीब परिवार में इतना बड़ा खर्च हो सकता है? शादी में डीजे बेंड डांसर दहेज में गाड़िया सोना चांदी के आभुषण एक गरीब पिता कर्ज लेता है समाज में जीने के लिए फिर वह जींदगी भर उस कर्ज की मार से उपर नहीं उठ पाता।
वर्तमान में केवल सन्त रामपाल जी महाराज जी नें ही शादियाँ में होने वाले फिजूलखर्च का विरोध किया है आज भी संत रामपाल जी महाराज के 
अनुयाई ऐसे ही करते हैं। 17 मिनट की असुर निकंदन रमैणी है। फेरों के स्थान
पर उसको बोला जाता है जो करोड़ गायत्रा मंत्रा (¬ भूर्भवः ...) से उत्तम तथा
लाभदायक है। जिसमें विश्व के सर्व देवी-देव तथा पूर्ण परमात्मा का आह्वान तथा
स्तुति-प्रार्थना है। जिस कारण से सर्व शक्तियां उस विवाह वाले जोड़े की सदा रक्षा
तथा सहायता करते हैं। इससे बेटी बची रहेगी। जीने की सुगम राह हो जाएगी।

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